किस्से

किस्सा चीर पर्व (महाभारत) दुर्योधन,शकुनी और दुशाशन मिल कर पांडवों को जुए में हराने की योजना बनाते हैं- आपस के बैर विवाद से कोये नफा किसी को है ना।।टेक।। पुत्र पिता का बैर था भाई,राम नाम से हुई थी लड़ाई,नरसिंह बण कै ज्यान खपाई,हिरण्याकश्यप घटे प्रहलाद से,पड़ा नाम हरि का लेना।। सिन्थ उपसिन्थ मां जाये बीर थे,त्रिया कारण हुये आखिर थे,कुरू वंश में शुभ कर्म सीर थे,जिनका मेल कई बुनियाद से,पड़ा रवि शशि ज्यूं गहना।। चकुवे बैन हुए बलकारी,जिसनै जा […]

चीर पर्व (महाभारत)-पं. लख्मीचंद और पढ़णा सै...

किस्से

किस्सा चंदकिरण एक समय की बात है कि मदनपुर शहर में राजा मदन सेन राज करते थे। उनकी धर्मपत्नी का नाम नागदे था। महाराज अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए वेश बदलकर शहर में घूमा करते थे। एक दिन दुकान पर राजा ने एक बहुत ही सुंदर स्त्री का फोटो देखा। इतनी सुंदर स्त्री राजा ने कभी नहीं देखी थी। परिणाम स्वरूप राजा उसके ऊपर मोहित हो गया और दुकानदार जो की एक बुढिया थी उससे क्या पूछता है-

चंदकिरण-पं. लख्मीचंद और पढ़णा सै...

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